श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.43.23

दशम स्कन्ध · अध्याय 43 · अथ त्रिचत्वारिंशोऽध्यायः

एतौ भगवतः साक्षाद्धरेर्नारायणस्य हि।

अवतीर्णाविहांशेन वसुदेवस्य वेश्मनि॥ २३

etau bhagavataḥ sākṣāddharernārāyaṇasya hi|

avatīrṇāvihāṃśena vasudevasya veśmani|| 23

अर्थ

‘ये दोनों साक्षात् भगवान् नारायणके अंश हैं। इस पृथ्वीपर वसुदेवजीके घरमें अवतीर्ण हुए हैं॥ २३॥

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