श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.44.8

दशम स्कन्ध · अध्याय 44 · अथ चतुश्‍चत्वारिंशोऽध्यायः

क्व वज्रसारसर्वांगौ मल्लौ शैलेन्द्रसन्‍निभौ।

क्व चातिसुकुमारांगौ किशोरौ नाप्तयौवनौ॥ ८

kva vajrasārasarvāṃgau mallau śailendrasannibhau|

kva cātisukumārāṃgau kiśorau nāptayauvanau|| 8

अर्थ

बहिन! देखो, इन पहलवानोंका एक-एक अंग वज्रके समान कठोर है। ये देखनेमें बड़े भारी पर्वत-से मालूम होते हैं। परन्तु श्रीकृष्ण और बलराम अभी जवान भी नहीं हुए हैं। इनकी किशोरावस्था है। इनका एक-एक अंग अत्यन्त सुकुमार है। कहाँ ये और कहाँ वे?॥ ८॥

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