जिन्हें पालन-पोषण न कर सकनेके कारण स्वजन-सम्बन्धियोंने त्याग दिया है, उन बालकोंको जो लोग अपने पुत्रके समान लाड़-प्यारसे पालते हैं, वे ही वास्तवमें उनके माँ-बाप हैं॥ २२॥✎ 1674
स पिता सा च जननी यौ पुष्णीतां स्वपुत्रवत्।
शिशून् बन्धुभिरुत्सृष्टानकल्पैः पोषरक्षणे॥ २२
जिन्हें पालन-पोषण न कर सकनेके कारण स्वजन-सम्बन्धियोंने त्याग दिया है, उन बालकोंको जो लोग अपने पुत्रके समान लाड़-प्यारसे पालते हैं, वे ही वास्तवमें उनके माँ-बाप हैं॥ २२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.45.22 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 410) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/45/22/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)