श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.45.39

दशम स्कन्ध · अध्याय 45 · अथ पञ्चचत्वारिंशोऽध्यायः

तमाह भगवानाशु गुरुपुत्रः प्रदीयताम्।

योऽसाविह त्वया ग्रस्तो बालको महतोर्मिणा॥ ३९

tamāha bhagavānāśu guruputraḥ pradīyatām|

yo'sāviha tvayā grasto bālako mahatormiṇā|| 39

अर्थ

भगवान्‌ने समुद्रसे कहा—‘समुद्र! तुम यहाँ अपनी बड़ी-बड़ी तरंगोंसे हमारे जिस गुरुपुत्रको बहा ले गये थे, उसे लाकर शीघ्र हमें दो’॥ ३९॥

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