श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.46.29

दशम स्कन्ध · अध्याय 46 · अथ षट्चत्वारिंशोऽध्यायः

तयोरित्थं भगवति कृष्णे नन्दयशोदयोः।

वीक्ष्यानुरागं परमं नन्दमाहोद्धवो मुदा॥ २९

tayoritthaṃ bhagavati kṛṣṇe nandayaśodayoḥ|

vīkṣyānurāgaṃ paramaṃ nandamāhoddhavo mudā|| 29

अर्थ

उद्धवजी नन्दबाबा और यशोदारानीके हृदयमें श्रीकृष्णके प्रति कैसा अगाध अनुराग है—यह देखकर आनन्दम‌ग्‍न हो गये और उनसे कहने लगे॥ २९॥

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