॥ श्रीहरिः ॥
तयोरित्थं भगवति कृष्णे नन्दयशोदयोः।
वीक्ष्यानुरागं परमं नन्दमाहोद्धवो मुदा॥ २९
tayoritthaṃ bhagavati kṛṣṇe nandayaśodayoḥ|
vīkṣyānurāgaṃ paramaṃ nandamāhoddhavo mudā|| 29
अर्थ
उद्धवजी नन्दबाबा और यशोदारानीके हृदयमें श्रीकृष्णके प्रति कैसा अगाध अनुराग है—यह देखकर आनन्दमग्न हो गये और उनसे कहने लगे॥ २९॥
तयोरित्थं भगवति कृष्णे नन्दयशोदयोः।
वीक्ष्यानुरागं परमं नन्दमाहोद्धवो मुदा॥ २९
उद्धवजी नन्दबाबा और यशोदारानीके हृदयमें श्रीकृष्णके प्रति कैसा अगाध अनुराग है—यह देखकर आनन्दमग्न हो गये और उनसे कहने लगे॥ २९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.46.29 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 418) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/46/29/