श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.46.36

दशम स्कन्ध · अध्याय 46 · अथ षट्चत्वारिंशोऽध्यायः

मा खिद्यतं महाभागौ द्रक्ष्यथः कृष्णमन्तिके।

अन्तर्हृदि स भूतानामास्ते ज्योतिरिवैधसि॥ ३६

mā khidyataṃ mahābhāgau drakṣyathaḥ kṛṣṇamantike|

antarhṛdi sa bhūtānāmāste jyotirivaidhasi|| 36

अर्थ

नन्दबाबा और माता यशोदाजी! आप दोनों परम भाग्यशाली हैं। खेद न करें। आप श्रीकृष्णको अपने पास ही देखेंगे; क्योंकि जैसे काष्ठमें अग्‍नि सदा ही व्यापक रूपसे रहती है, वैसे ही वे समस्त प्राणियोंके हृदयमें सर्वदा विराजमान रहते हैं॥ ३६॥

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