उद्धवजीने कहा—अहो गोपियो! तुम कृतकृत्य हो। तुम्हारा जीवन सफल है। देवियो! तुम सारे संसारके लिये पूजनीय हो; क्योंकि तुमलोगोंने इस प्रकार भगवान् श्रीकृष्णको अपना हृदय, अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया है॥ २३॥
अहो यूयं स्म पूर्णार्था भवत्यो लोकपूजिताः।
वासुदेवे भगवति यासामित्यर्पितं मनः॥ २३
उद्धवजीने कहा—अहो गोपियो! तुम कृतकृत्य हो। तुम्हारा जीवन सफल है। देवियो! तुम सारे संसारके लिये पूजनीय हो; क्योंकि तुमलोगोंने इस प्रकार भगवान् श्रीकृष्णको अपना हृदय, अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया है॥ २३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.47.23 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 426) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/47/23/