श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.47.24

दशम स्कन्ध · अध्याय 47 · अथ सप्तचत्वारिंशोऽध्यायः

दानव्रततपोहोमजपस्वाध्यायसंयमैः ।

श्रेयोभिर्विविधैश्‍चान्यैः कृष्णे भक्तिर्हि साध्यते॥ २४

dānavratatapohomajapasvādhyāyasaṃyamaiḥ |

śreyobhirvividhaiścānyaiḥ kṛṣṇe bhaktirhi sādhyate|| 24

अर्थ

दान, व्रत, तप, होम, जप, वेदाध्ययन, ध्यान, धारणा, समाधि और कल्याणके अन्य विविध साधनोंके द्वारा भगवान्‌की भक्ति प्राप्त हो, यही प्रयत्‍न किया जाता है॥ २४॥

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