bhavadbhyāṃ na vinā kiṃcit paramasti na cāparam|| 18
अर्थ
आप दोनों जगत्के कारण और जगद्रूप, आदिपुरुष हैं। आपके अतिरिक्त और कोई वस्तु नहीं है, न कारण और न तो कार्य॥ १८॥✎ 1680
युवां प्रधानपुरुषौ जगद्धेतू जगन्मयौ।
भवद्भ्यां न विना किंचित् परमस्ति न चापरम्॥ १८
आप दोनों जगत्के कारण और जगद्रूप, आदिपुरुष हैं। आपके अतिरिक्त और कोई वस्तु नहीं है, न कारण और न तो कार्य॥ १८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.48.18 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 437) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/48/18/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)