हमने ऐसा सुना है कि राजा पाण्डुके मर जानेपर अपनी माता कुन्तीके साथ युधिष्ठिर आदि पाण्डव बड़े दुःखमें पड़ गये थे। अब राजा धृतराष्ट्र उन्हें अपनी राजधानी हस्तिनापुरमें ले आये हैं और वे वहीं रहते हैं॥ ३३॥
पितर्युपरते बालाः सह मात्रा सुदुःखिताः।
आनीताः स्वपुरं राज्ञा वसन्त इति शुश्रुम॥ ३३
हमने ऐसा सुना है कि राजा पाण्डुके मर जानेपर अपनी माता कुन्तीके साथ युधिष्ठिर आदि पाण्डव बड़े दुःखमें पड़ गये थे। अब राजा धृतराष्ट्र उन्हें अपनी राजधानी हस्तिनापुरमें ले आये हैं और वे वहीं रहते हैं॥ ३३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.48.33 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 439) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/48/33/