श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.49.13

दशम स्कन्ध · अध्याय 49 · अथैकोनपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

नमः कृष्णाय शुद्धाय ब्रह्मणे परमात्मने।

योगेश्‍वराय योगाय त्वामहं शरणं गता॥ १३

namaḥ kṛṣṇāya śuddhāya brahmaṇe paramātmane|

yogeśvarāya yogāya tvāmahaṃ śaraṇaṃ gatā|| 13

अर्थ

श्रीकृष्ण! तुम मायाके लेशसे रहित परम शुद्ध हो। तुम स्वयं परब्रह्म परमात्मा हो। समस्त साधनों, योगों और उपायोंके स्वामी हो तथा स्वयं योग भी हो। श्रीकृष्ण! मैं तुम्हारी शरणमें आयी हूँ। तुम मेरी रक्षा करो’॥ १३॥✎ 2106

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #2106 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि

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