श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.49.20

दशम स्कन्ध · अध्याय 49 · अथैकोनपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

नेह चात्यन्तसंवासः कर्हिचित् केनचित् सह।

राजन् स्वेनापि देहेन किमु जायात्मजादिभिः॥ २०

neha cātyantasaṃvāsaḥ karhicit kenacit saha|

rājan svenāpi dehena kimu jāyātmajādibhiḥ|| 20

अर्थ

आप जानते ही हैं कि इस संसारमें कभी कहीं कोई किसीके साथ सदा नहीं रह सकता। जिनसे जुड़े हुए हैं, उनसे एक दिन बिछुड़ना पड़ेगा ही। राजन्! यह बात अपने शरीरके लिये भी सोलहों आने सत्य है। फिर स्त्री, पुत्र, धन आदिको छोड़कर जाना पड़ेगा, इसके विषयमें तो कहना ही क्या है॥ २०॥

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