॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.49.24
स्वयं किल्बिषमादाय तैस्त्यक्तो नार्थकोविदः।
असिद्धार्थो विशत्यन्धं स्वधर्मविमुखस्तमः॥ २४
svayaṃ kilbiṣamādāya taistyakto nārthakovidaḥ|
asiddhārtho viśatyandhaṃ svadharmavimukhastamaḥ|| 24
अर्थ
जो अपने धर्मसे विमुख है—सच पूछिये, तो वह अपना लौकिक स्वार्थ भी नहीं जानता। जिनके लिये वह अधर्म करता है, वे तो उसे छोड़ ही देंगे; उसे कभी सन्तोषका अनुभव न होगा और वह अपने पापोंकी गठरी सिरपर लादकर स्वयं घोर नरकमें जायगा॥ २४॥