॥ श्रीहरिः ॥
अपि स्मरन्ति नः सौम्य पितरौ भ्रातरश्च मे।
भगिन्यो भ्रातृपुत्राश्च जामयः सख्य एव च॥ ८
api smaranti naḥ saumya pitarau bhrātaraśca me|
bhaginyo bhrātṛputrāśca jāmayaḥ sakhya eva ca|| 8
अर्थ
‘प्यारे भाई! क्या कभी मेरे माँ-बाप, भाई-बहिन, भतीजे, कुलकी स्त्रियाँ और सखी-सहेलियाँ मेरी याद करती हैं?॥ ८॥✎ 2106
अपि स्मरन्ति नः सौम्य पितरौ भ्रातरश्च मे।
भगिन्यो भ्रातृपुत्राश्च जामयः सख्य एव च॥ ८
‘प्यारे भाई! क्या कभी मेरे माँ-बाप, भाई-बहिन, भतीजे, कुलकी स्त्रियाँ और सखी-सहेलियाँ मेरी याद करती हैं?॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.49.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 441) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/49/8/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
- #2106 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि