उसकी चिल्लाहटका वेग बड़ा भयंकर था। उसके प्रभावसे पहाड़ोंके साथ पृथ्वी और ग्रहोंके साथ अन्तरिक्ष डगमगा उठा। सातों पाताल और दिशाएँ गूँज उठीं। बहुत-से लोग वज्रपातकी आशंकासे पृथ्वीपर गिर पड़े॥ १२॥
तस्याः स्वनेनातिगभीररंहसा
साद्रिर्मही द्यौश्च चचाल सग्रहा।
रसा दिशश्च प्रतिनेदिरे जनाः
पेतुः क्षितौ वज्रनिपातशंकया॥ १२
उसकी चिल्लाहटका वेग बड़ा भयंकर था। उसके प्रभावसे पहाड़ोंके साथ पृथ्वी और ग्रहोंके साथ अन्तरिक्ष डगमगा उठा। सातों पाताल और दिशाएँ गूँज उठीं। बहुत-से लोग वज्रपातकी आशंकासे पृथ्वीपर गिर पड़े॥ १२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.6.12 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 158) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/6/12/