॥ श्रीहरिः ॥
पतमानोऽपि तद्देहस्त्रिगव्यूत्यन्तरद्रुमान्।
चूर्णयामास राजेन्द्र महदासीत्तदद्भुतम्॥ १४
patamāno'pi taddehastrigavyūtyantaradrumān|
cūrṇayāmāsa rājendra mahadāsīttadadbhutam|| 14
अर्थ
राजेन्द्र! पूतनाके शरीरने गिरते-गिरते भी छः कोसके भीतरके वृक्षोंको कुचल डाला। यह बड़ी ही अद्भुत घटना हुई॥ १४॥
पतमानोऽपि तद्देहस्त्रिगव्यूत्यन्तरद्रुमान्।
चूर्णयामास राजेन्द्र महदासीत्तदद्भुतम्॥ १४
राजेन्द्र! पूतनाके शरीरने गिरते-गिरते भी छः कोसके भीतरके वृक्षोंको कुचल डाला। यह बड़ी ही अद्भुत घटना हुई॥ १४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.6.14 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 158) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/6/14/