इसी समय नन्दबाबा और उनके साथी गोप मथुरासे गोकुलमें पहुँचे । जब उन्होंने पूतनाका भयंकर शरीर देखा, तब वे आश्चर्यचकित हो गये॥ ३१॥✎ 2060
तावन्नन्दादयो गोपा मथुराया व्रजं गताः।
विलोक्य पूतनादेहं बभूवुरतिविस्मिताः॥ ३१
इसी समय नन्दबाबा और उनके साथी गोप मथुरासे गोकुलमें पहुँचे । जब उन्होंने पूतनाका भयंकर शरीर देखा, तब वे आश्चर्यचकित हो गये॥ ३१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.6.31 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 160) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/6/31/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)