श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.6.31

दशम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

तावन्‍नन्दादयो गोपा मथुराया व्रजं गताः।

विलोक्य पूतनादेहं बभूवुरतिविस्मिताः॥ ३१

tāvannandādayo gopā mathurāyā vrajaṃ gatāḥ|

vilokya pūtanādehaṃ babhūvurativismitāḥ|| 31

अर्थ

इसी समय नन्दबाबा और उनके साथी गोप मथुरासे गोकुलमें पहुँचे । जब उन्होंने पूतनाका भयंकर शरीर देखा, तब वे आश्‍चर्यचकित हो गये॥ ३१॥✎ 2060

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #2060 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि

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