श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.6.43

दशम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

नन्दः स्वपुत्रमादाय प्रेत्यागतमुदारधीः।

मूर्ध्‍न्‍युपाघ्राय परमां मुदं लेभे कुरूद्वह॥ ४३

nandaḥ svaputramādāya pretyāgatamudāradhīḥ|

mūrdhnyupāghrāya paramāṃ mudaṃ lebhe kurūdvaha|| 43

अर्थ

परीक्षित्! उदारशिरोमणि नन्दबाबाने मृत्युके मुखसे बचे हुए अपने लालाको गोदमें उठा लिया और बार-बार उसका सिर सूँघकर मन-ही-मन बहुत आनन्दित हुए॥ ४३॥

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