वहाँ गोपोंने उन्हें पूतनाके आनेसे लेकर मरनेतकका सारा वृत्तान्त कह सुनाया। वे लोग पूतनाकी मृत्यु और श्रीकृष्णके कुशलपूर्वक बच जानेकी बात सुनकर बड़े ही आश्चर्यचकित हुए॥ ४२॥
ते तत्र वर्णितं गोपैः पूतनागमनादिकम्।
श्रुत्वा तन्निधनं स्वस्ति शिशोश्चासन् सुविस्मिताः॥ ४२
वहाँ गोपोंने उन्हें पूतनाके आनेसे लेकर मरनेतकका सारा वृत्तान्त कह सुनाया। वे लोग पूतनाकी मृत्यु और श्रीकृष्णके कुशलपूर्वक बच जानेकी बात सुनकर बड़े ही आश्चर्यचकित हुए॥ ४२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.6.42 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 161) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/6/42/