श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.62.14

दशम स्कन्ध · अध्याय 62 · अथ द्विषष्टितमोऽध्यायः

बाणस्य मन्त्री कुम्भाण्डश्‍चित्रलेखा च तत्सुता।

सख्यपृच्छत् सखीमूषां कौतूहलसमन्विता॥ १४

bāṇasya mantrī kumbhāṇḍaścitralekhā ca tatsutā|

sakhyapṛcchat sakhīmūṣāṃ kautūhalasamanvitā|| 14

अर्थ

परीक्षित्! बाणासुरके मन्त्रीका नाम था कुम्भाण्ड। उसकी एक कन्या थी, जिसका नाम था चित्रलेखा। ऊषा और चित्रलेखा एक-दूसरेकी सहेलियाँ थीं। चित्रलेखाने ऊषासे कौतूहलवश पूछा—॥ १४॥

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