परीक्षित्! यदुनन्दन साम्ब अचिन्त्यैश्वर्यशाली भगवान् श्रीकृष्णके पुत्र थे। कौरवोंके प्रहारसे वे उनपर चिढ़ गये, जैसे सिंह तुच्छ हरिनोंका पराक्रम देखकर चिढ़ जाता है॥ ८॥✎ 1858
सोऽपविद्धः कुरुश्रेष्ठ कुरुभिर्यदुनन्दनः।
नामृष्यत्तदचिन्त्यार्भः सिंहः क्षुद्रमृगैरिव॥ ८
परीक्षित्! यदुनन्दन साम्ब अचिन्त्यैश्वर्यशाली भगवान् श्रीकृष्णके पुत्र थे। कौरवोंके प्रहारसे वे उनपर चिढ़ गये, जैसे सिंह तुच्छ हरिनोंका पराक्रम देखकर चिढ़ जाता है॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.68.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 554) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/68/8/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1858 अक्षर (एक स्थानपर, प्रमाणसहित): ्सिंहके → सिंहके