साम्बने अपने सुन्दर धनुषका टंकार करके कर्ण आदि छः वीरोंपर, जो अलग-अलग छः रथोंपर सवार थे, छः-छः बाणोंसे एक साथ अलग-अलग प्रहार किया॥ ९॥✎ 1858
विस्फूर्ज्य रुचिरं चापं सर्वान् विव्याध सायकैः।
कर्णादीन् षड्रथान् वीरांस्तावद्भिर्युगपत् पृथक्॥ ९
साम्बने अपने सुन्दर धनुषका टंकार करके कर्ण आदि छः वीरोंपर, जो अलग-अलग छः रथोंपर सवार थे, छः-छः बाणोंसे एक साथ अलग-अलग प्रहार किया॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.68.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 554) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/68/9/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1858 अक्षर (एक स्थानपर, प्रमाणसहित): ्सिंहके → सिंहके