श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.7.18

दशम स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

एकदाऽऽरोहमारूढं लालयन्ती सुतं सती।

गरिमाणं शिशोर्वोढुं न सेहे गिरिकूटवत्॥ १८

ekadā''rohamārūḍhaṃ lālayantī sutaṃ satī|

garimāṇaṃ śiśorvoḍhuṃ na sehe girikūṭavat|| 18

अर्थ

एक दिनकी बात है, सती यशोदाजी अपने प्यारे लल्लाको गोदमें लेकर दुलार रही थीं। सहसा श्रीकृष्ण चट्टानके समान भारी बन गये। वे उनका भार न सह सकीं॥ १८॥✎ 2061

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
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