श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.7.22

दशम स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

मुहूर्तमभवद् गोष्ठं रजसा तमसाऽऽवृतम्।

सुतं यशोदा नापश्यत्तस्मिन् न्यस्तवती यतः॥ २२

muhūrtamabhavad goṣṭhaṃ rajasā tamasā''vṛtam|

sutaṃ yaśodā nāpaśyattasmin nyastavatī yataḥ|| 22

अर्थ

सारा व्रज दो घड़ीतक रज और तमसे ढका रहा। यशोदाजीने अपने पुत्रको जहाँ बैठा दिया था, वहाँ जाकर देखा तो श्रीकृष्ण वहाँ नहीं थे॥ २२॥

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