॥ श्रीहरिः ॥
गोकुलं सर्वमावृण्वन् मुष्णंश्चक्षूंषि रेणुभिः।
ईरयन् सुमहाघोरशब्देन प्रदिशो दिशः॥ २१
gokulaṃ sarvamāvṛṇvan muṣṇaṃścakṣūṃṣi reṇubhiḥ|
īrayan sumahāghoraśabdena pradiśo diśaḥ|| 21
अर्थ
उसने व्रजरजसे सारे गोकुलको ढक दिया और लोगोंकी देखनेकी शक्ति हर ली। उसके अत्यन्त भयंकर शब्दसे दसों दिशाएँ काँप उठीं॥ २१॥
गोकुलं सर्वमावृण्वन् मुष्णंश्चक्षूंषि रेणुभिः।
ईरयन् सुमहाघोरशब्देन प्रदिशो दिशः॥ २१
उसने व्रजरजसे सारे गोकुलको ढक दिया और लोगोंकी देखनेकी शक्ति हर ली। उसके अत्यन्त भयंकर शब्दसे दसों दिशाएँ काँप उठीं॥ २१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.7.21 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 164) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/7/21/