श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.7.26

दशम स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

तृणावर्तः शान्तरयो वात्यारूपधरो हरन्।

कृष्णं नभोगतो गन्तुं नाशक्‍नोद् भूरिभारभृत्॥ २६

tṛṇāvartaḥ śāntarayo vātyārūpadharo haran|

kṛṣṇaṃ nabhogato gantuṃ nāśaknod bhūribhārabhṛt|| 26

अर्थ

इधर तृणावर्त बवंडररूपसे जब भगवान् श्रीकृष्णको आकाशमें उठा ले गया, तब उनके भारी बोझको न सँभाल सकनेके कारण उसका वेग शान्त हो गया। वह अधिक चल न सका॥ २६॥

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