अन्तःपुरकी स्त्रियाँ भगवान् श्रीकृष्णको देखकर प्रेम और आनन्दसे भर गयीं। उन्होंने अपने प्रेमविह्वल और आनन्दसे खिले नेत्रोंके द्वारा भगवान्का स्वागत किया और श्रीकृष्ण उनका स्वागत-सत्कार स्वीकार करते हुए राजमहलमें पधारे॥ ३८॥
अन्तःपुरजनैः प्रीत्या मुकुन्दः फुल्ललोचनैः।
ससम्भ्रमैरभ्युपेतः प्राविशद् राजमन्दिरम्॥ ३८
अन्तःपुरकी स्त्रियाँ भगवान् श्रीकृष्णको देखकर प्रेम और आनन्दसे भर गयीं। उन्होंने अपने प्रेमविह्वल और आनन्दसे खिले नेत्रोंके द्वारा भगवान्का स्वागत किया और श्रीकृष्ण उनका स्वागत-सत्कार स्वीकार करते हुए राजमहलमें पधारे॥ ३८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.71.38 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 579) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/71/38/