श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.71.38

दशम स्कन्ध · अध्याय 71 · अथैकसप्ततितमोऽध्यायः

अन्तःपुरजनैः प्रीत्या मुकुन्दः फुल्ललोचनैः।

ससम्भ्रमैरभ्युपेतः प्राविशद् राजमन्दिरम्॥ ३८

antaḥpurajanaiḥ prītyā mukundaḥ phullalocanaiḥ|

sasambhramairabhyupetaḥ prāviśad rājamandiram|| 38

अर्थ

अन्तःपुरकी स्त्रियाँ भगवान् श्रीकृष्णको देखकर प्रेम और आनन्दसे भर गयीं। उन्होंने अपने प्रेमविह्वल और आनन्दसे खिले नेत्रोंके द्वारा भगवान्‌का स्वागत किया और श्रीकृष्ण उनका स्वागत-सत्कार स्वीकार करते हुए राजमहलमें पधारे॥ ३८॥

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