श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.75.40

दशम स्कन्ध · अध्याय 75 · अथ पञ्चसप्ततितमोऽध्यायः

एतत्तेऽभिहितं राजन् यत् पृष्टोऽहमिह त्वया।

सुयोधनस्य दौरात्म्यं राजसूये महाक्रतौ॥ ४०

etatte'bhihitaṃ rājan yat pṛṣṭo'hamiha tvayā|

suyodhanasya daurātmyaṃ rājasūye mahākratau|| 40

अर्थ

परीक्षित्! तुमने मुझसे यह पूछा था कि उस महान् राजसूय-यज्ञमें दुर्योधनको डाह क्यों हुआ? जलन क्यों हुई? सो वह सब मैंने तुम्हें बतला दिया॥ ४०॥

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां दशमस्कन्धे उत्तरार्धे
दुर्योधनमानभंगो नाम पञ्चसप्ततितमोऽध्यायः॥ ७५॥

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