महामना प्रद्युम्नजीके इस अद्भुत और महान् कर्मको देखकर अपने एवं पराये—सभी सैनिक उनकी प्रशंसा करने लगे॥ २०॥
तदद्भुतं महत् कर्म प्रद्युम्नस्य महात्मनः।
दृष्ट्वा तं पूजयामासुः सर्वे स्वपरसैनिकाः॥ २०
महामना प्रद्युम्नजीके इस अद्भुत और महान् कर्मको देखकर अपने एवं पराये—सभी सैनिक उनकी प्रशंसा करने लगे॥ २०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.76.20 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 604) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/76/20/