श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! यदुवंशियोंके कुलपुरोहित थे श्रीगर्गाचार्यजी। वे बड़े तपस्वी थे। वसुदेवजीकी प्रेरणासे वे एक दिन नन्दबाबाके गोकुलमें आये॥ १॥
गर्गः पुरोहितो राजन् यदूनां सुमहातपाः।
व्रजं जगाम नन्दस्य वसुदेवप्रचोदितः॥ १
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! यदुवंशियोंके कुलपुरोहित थे श्रीगर्गाचार्यजी। वे बड़े तपस्वी थे। वसुदेवजीकी प्रेरणासे वे एक दिन नन्दबाबाके गोकुलमें आये॥ १॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.8.1 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 167) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/8/1/