श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.8.2

दशम स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

तं दृष्ट्वा परमप्रीतः प्रत्युत्थाय कृतांजलिः।

आनर्चाधोक्षजधिया प्रणिपातपुरःसरम्॥ २

taṃ dṛṣṭvā paramaprītaḥ pratyutthāya kṛtāṃjaliḥ|

ānarcādhokṣajadhiyā praṇipātapuraḥsaram|| 2

अर्थ

उन्हें देखकर नन्दबाबाको बड़ी प्रसन्‍नता हुई। वे हाथ जोड़कर उठ खड़े हुए। उनके चरणोंमें प्रणाम किया। इसके बाद ‘ये स्वयं भगवान् ही हैं’—इस भावसे उनकी पूजा की॥ २॥

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