श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.8.20

दशम स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

इत्यात्मानं समादिश्य गर्गे च स्वगृहं गते।

नन्दः प्रमुदितो मेने आत्मानं पूर्णमाशिषाम्॥ २०

ityātmānaṃ samādiśya garge ca svagṛhaṃ gate|

nandaḥ pramudito mene ātmānaṃ pūrṇamāśiṣām|| 20

अर्थ

इस प्रकार नन्दबाबाको भलीभाँति समझाकर, आदेश देकर गर्गाचार्यजी अपने आश्रमको लौट गये। उनकी बात सुनकर नन्दबाबाको बड़ा ही आनन्द हुआ। उन्होंने ऐसा समझा कि मेरी सब आशा-लालसाएँ पूरी हो गयीं, मैं अब कृतकृत्य हूँ॥ २०॥

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