श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.8.21

दशम स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

कालेन व्रजताल्पेन गोकुले रामकेशवौ।

जानुभ्यां सह पाणिभ्यां रिंगमाणौ विजह्रतुः॥ २१✎ 1142

kālena vrajatālpena gokule rāmakeśavau|

jānubhyāṃ saha pāṇibhyāṃ riṃgamāṇau vijahratuḥ|| 21

अर्थ

परीक्षित्! कुछ ही दिनोंमें राम और श्याम घुटनों और हाथोंके बल बकैयाँ चल-चलकर गोकुलमें खेलने लगे॥ २१॥

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1142 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): विजहृतु:॥ → विजह्रतुः॥

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