jānubhyāṃ saha pāṇibhyāṃ riṃgamāṇau vijahratuḥ|| 21
अर्थ
परीक्षित्! कुछ ही दिनोंमें राम और श्याम घुटनों और हाथोंके बल बकैयाँ चल-चलकर गोकुलमें खेलने लगे॥ २१॥
कालेन व्रजताल्पेन गोकुले रामकेशवौ।
जानुभ्यां सह पाणिभ्यां रिंगमाणौ विजह्रतुः॥ २१
परीक्षित्! कुछ ही दिनोंमें राम और श्याम घुटनों और हाथोंके बल बकैयाँ चल-चलकर गोकुलमें खेलने लगे॥ २१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.8.21 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 170) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/8/21/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1142 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): विजहृतु:॥ → विजह्रतुः॥