श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.8.44

दशम स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

सद्योनष्टस्मृतिर्गोपी साऽऽरोप्यारोहमात्मजम्।

प्रवृद्धस्नेहकलिलहृदयाऽऽसीद् यथा पुरा॥ ४४

sadyonaṣṭasmṛtirgopī sā''ropyārohamātmajam|

pravṛddhasnehakalilahṛdayā''sīd yathā purā|| 44

अर्थ

यशोदाजीको तुरंत वह घटना भूल गयी। उन्होंने अपने दुलारे लालको गोदमें उठा लिया। जैसे पहले उनके हृदयमें प्रेमका समुद्र उमड़ता रहता था, वैसे ही फिर उमड़ने लगा॥ ४४॥

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