श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.8.43

दशम स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

इत्थं विदिततत्त्वायां गोपिकायां स ईश्‍वरः।

वैष्णवीं व्यतनोन्मायां पुत्रस्नेहमयीं विभुः॥ ४३

itthaṃ viditatattvāyāṃ gopikāyāṃ sa īśvaraḥ|

vaiṣṇavīṃ vyatanonmāyāṃ putrasnehamayīṃ vibhuḥ|| 43

अर्थ

जब इस प्रकार यशोदा माता श्रीकृष्णका तत्त्व समझ गयीं, तब सर्वशक्तिमान् सर्वव्यापक प्रभुने अपनी पुत्रस्नेहमयी वैष्णवी योगमायाका उनके हृदयमें संचार कर दिया॥ ४३॥

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