श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.80.28

दशम स्कन्ध · अध्याय 80 · अथाशीतितमोऽध्यायः

श्रीभगवानुवाच

अपि ब्रह्मन् गुरुकुलाद् भवता लब्धदक्षिणात्।

समावृत्तेन धर्मज्ञ भार्योढा सदृशी न वा॥ २८

api brahman gurukulād bhavatā labdhadakṣiṇāt|

samāvṛttena dharmajña bhāryoḍhā sadṛśī na vā|| 28

अर्थ

भगवान् श्रीकृष्णने कहा—धर्मके मर्मज्ञ ब्राह्मणदेव! गुरुदक्षिणा देकर जब आप गुरुकुलसे लौट आये, तब आपने अपने अनुरूप स्त्रीसे विवाह किया या नहीं?॥ २८॥

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