श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.80.31

दशम स्कन्ध · अध्याय 80 · अथाशीतितमोऽध्यायः

कच्चिद् गुरुकुले वासं ब्रह्मन् स्मरसि नौ यतः।

द्विजो विज्ञाय विज्ञेयं तमसः पारमश्‍नुते॥ ३१

kaccid gurukule vāsaṃ brahman smarasi nau yataḥ|

dvijo vijñāya vijñeyaṃ tamasaḥ pāramaśnute|| 31

अर्थ

ब्राह्मणशिरोमणे! क्या आपको उस समयकी बात याद है, जब हम दोनों एक साथ गुरुकुलमें निवास करते थे। सचमुच गुरुकुलमें ही द्विजातियोंको अपने ज्ञातव्य वस्तुका ज्ञान होता है, जिसके द्वारा वे अज्ञानान्धकारसे पार हो जाते हैं॥ ३१॥

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