भगवान् श्रीकृष्णने कहा—पिताजी! हम तो आपके पुत्र ही हैं। हमें लक्ष्य करके आपने यह ब्रह्मज्ञानका उपदेश किया है। हम आपकी एक-एक बात युक्तियुक्त मानते हैं॥ २२॥
वचो वः समवेतार्थं तातैतदुपमन्महे।
यन्नः पुत्रान् समुद्दिश्य तत्त्वग्राम उदाहृतः॥ २२
भगवान् श्रीकृष्णने कहा—पिताजी! हम तो आपके पुत्र ही हैं। हमें लक्ष्य करके आपने यह ब्रह्मज्ञानका उपदेश किया है। हम आपकी एक-एक बात युक्तियुक्त मानते हैं॥ २२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.85.22 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 655) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/85/22/