श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.85.22

दशम स्कन्ध · अध्याय 85 · अथ पञ्चाशीतितमोऽध्यायः

श्रीभगवानुवाच

वचो वः समवेतार्थं तातैतदुपमन्महे।

यन्‍नः पुत्रान् समुद्दिश्य तत्त्वग्राम उदाहृतः॥ २२

vaco vaḥ samavetārthaṃ tātaitadupamanmahe|

yannaḥ putrān samuddiśya tattvagrāma udāhṛtaḥ|| 22

अर्थ

भगवान् श्रीकृष्णने कहा—पिताजी! हम तो आपके पुत्र ही हैं। हमें लक्ष्य करके आपने यह ब्रह्मज्ञानका उपदेश किया है। हम आपकी एक-एक बात युक्तियुक्त मानते हैं॥ २२॥

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