श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.85.44

दशम स्कन्ध · अध्याय 85 · अथ पञ्चाशीतितमोऽध्यायः

इदमित्थमिति प्रायस्तव योगेश्‍वरेश्‍वर।

न विदन्त्यपि योगेशा योगमायां कुतो वयम्॥ ४४

idamitthamiti prāyastava yogeśvareśvara|

na vidantyapi yogeśā yogamāyāṃ kuto vayam|| 44

अर्थ

योगेश्‍वरोंके अधीश्‍वर! बड़े-बड़े योगेश्‍वर भी प्रायः यह बात नहीं जानते कि आपकी योगमाया यह है और ऐसी है; फिर हमारी तो बात ही क्या है?॥ ४४॥

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