परीक्षित्! देवी देवकी यह देखकर अत्यन्त विस्मित हो गयीं कि मरे हुए बालक लौट आये और फिर चले भी गये। उन्होंने ऐसा निश्चय किया कि यह श्रीकृष्णका ही कोई लीला-कौशल है॥ ५७॥✎ 1719
तं दृष्ट्वा देवकी देवी मृतागमननिर्गमम्।
मेने सुविस्मिता मायां कृष्णस्य रचितां नृप॥ ५७
परीक्षित्! देवी देवकी यह देखकर अत्यन्त विस्मित हो गयीं कि मरे हुए बालक लौट आये और फिर चले भी गये। उन्होंने ऐसा निश्चय किया कि यह श्रीकृष्णका ही कोई लीला-कौशल है॥ ५७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.85.57 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 659) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/85/57/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)