देवर्षि नारदने कहा—भगवन्! आप सच्चिदानन्दस्वरूप श्रीकृष्ण हैं। आपकी कीर्ति परम पवित्र है। आप समस्त प्राणियोंके परम कल्याण—मोक्षके लिये कमनीय कलावतार धारण किया करते हैं। मैं आपको नमस्कार करता हूँ॥ ४६॥
नमस्तस्मै भगवते कृष्णायामलकीर्तये।
यो धत्ते सर्वभूतानामभवायोशतीः कलाः॥ ४६
देवर्षि नारदने कहा—भगवन्! आप सच्चिदानन्दस्वरूप श्रीकृष्ण हैं। आपकी कीर्ति परम पवित्र है। आप समस्त प्राणियोंके परम कल्याण—मोक्षके लिये कमनीय कलावतार धारण किया करते हैं। मैं आपको नमस्कार करता हूँ॥ ४६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.87.46 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 687) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/87/46/