श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.17.4

एकादश स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

स इदानीं सुमहता कालेनामित्रकर्शन।

न प्रायो भविता मर्त्यलोके प्रागनुशासितः॥ ४

sa idānīṃ sumahatā kālenāmitrakarśana|

na prāyo bhavitā martyaloke prāganuśāsitaḥ|| 4

अर्थ

रिपुदमन! बहुत समय बीत जानेके कारण वह इस समय मर्त्यलोकमें प्रायः नहीं-सा रह गया है, क्योंकि आपको उसका उपदेश किये बहुत दिन हो गये हैं॥ ४॥

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