श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.21.19

एकादश स्कन्ध · अध्याय 21 · अथैकविंशोऽध्यायः

विषयेषु गुणाध्यासात् पुंसः संगस्ततो भवेत्।

संगात्तत्र भवेत् कामः कामादेव कलिर्नृणाम्॥ १९

viṣayeṣu guṇādhyāsāt puṃsaḥ saṃgastato bhavet|

saṃgāttatra bhavet kāmaḥ kāmādeva kalirnṛṇām|| 19

अर्थ

उद्धवजी! विषयोंमें कहीं भी गुणोंका आरोप करनेसे उस वस्तुके प्रति आसक्ति हो जाती है। आसक्ति होनेसे उसे अपने पास रखनेकी कामना हो जाती है और इस कामनाकी पूर्तिमें किसी प्रकारकी बाधा पड़नेपर लोगोंमें परस्पर कलह होने लगता है॥ १९॥✎ 1758

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1758 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: चेतना-शक्ति → चेतनाशक्ति

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