॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.25.17
विकुर्वन् क्रियया चाधीरनिर्वृत्तिश्च चेतसाम्।
गात्रास्वास्थ्यं मनो भ्रान्तं रज एतैर्निशामय॥ १७
vikurvan kriyayā cādhīranirvṛttiśca cetasām|
gātrāsvāsthyaṃ mano bhrāntaṃ raja etairniśāmaya|| 17
अर्थ
जब काम करते-करते जीवकी बुद्धि चंचल, ज्ञानेन्द्रियाँ असन्तुष्ट, कर्मेन्द्रियाँ विकारयुक्त, मन भ्रान्त और शरीर अस्वस्थ हो जाय, तब समझना चाहिये कि रजोगुण जोर पकड़ रहा है॥ १७॥