श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.27.55

एकादश स्कन्ध · अध्याय 27 · अथ सप्तविंशोऽध्यायः

कर्तुश्‍च सारथेर्हेतोरनुमोदितुरेव च।

कर्मणां भागिनः प्रेत्य भूयो भूयसि तत् फलम्॥ ५५

kartuśca sāratherhetoranumoditureva ca|

karmaṇāṃ bhāginaḥ pretya bhūyo bhūyasi tat phalam|| 55

अर्थ

जो लोग ऐसे कामोंमें सहायता, प्रेरणा अथवा अनुमोदन करते हैं, वे भी मरनेके बाद प्राप्त करनेवालेके समान ही फलके भागीदार होते हैं। यदि उनका हाथ अधिक रहा तो फल भी उन्हें अधिक ही मिलता है॥ ५५॥✎ 1769

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायामेकादशस्कन्धे सप्तविंशोऽध्यायः॥ २७॥

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1769 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: निष्काम-भावसे → निष्कामभावसे

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