श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.30.1

एकादश स्कन्ध · अध्याय 30 · अथ त्रिंशोऽध्यायः

अथ त्रिंशोऽध्यायः

यदुकुलका संहार

राजोवाच

ततो महाभागवत उद्धवे निर्गते वनम्।

द्वारवत्यां किमकरोद् भगवान् भूतभावनः॥ १

tato mahābhāgavata uddhave nirgate vanam|

dvāravatyāṃ kimakarod bhagavān bhūtabhāvanaḥ|| 1

अर्थ

राजा परीक्षित‍्ने पूछा—भगवन्! जब महाभागवत उद्धवजी बदरीवनको चले गये, तब भूतभावन भगवान् श्रीकृष्णने द्वारकामें क्या लीला रची?॥ १॥

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