पशून् द्रुह्यन्ति विस्रब्धाः प्रेत्य खादन्ति ते च तान्॥ १४
ye tvanevaṃvido'santaḥ stabdhāḥ sadabhimāninaḥ|
paśūn druhyanti visrabdhāḥ pretya khādanti te ca tān|| 14
अर्थ
जो इस विशुद्ध धर्मको नहीं जानते, वे घमंडी वास्तवमें तो दुष्ट हैं, परन्तु समझते हैं अपनेको श्रेष्ठ। वे धोखेमें पड़े हुए लोग पशुओंकी हिंसा करते हैं और मरनेके बाद वे पशु ही उन मारनेवालोंको खाते हैं॥ १४॥✎ 90217321733
ये त्वनेवंविदोऽसन्तः स्तब्धाः सदभिमानिनः।
पशून् द्रुह्यन्ति विस्रब्धाः प्रेत्य खादन्ति ते च तान्॥ १४
जो इस विशुद्ध धर्मको नहीं जानते, वे घमंडी वास्तवमें तो दुष्ट हैं, परन्तु समझते हैं अपनेको श्रेष्ठ। वे धोखेमें पड़े हुए लोग पशुओंकी हिंसा करते हैं और मरनेके बाद वे पशु ही उन मारनेवालोंको खाते हैं॥ १४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.5.14 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 739) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/11/5/14/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)