श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.7.58

एकादश स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

तेषु काले व्यजायन्त रचितावयवा हरेः।

शक्तिभिर्दुर्विभाव्याभिः कोमलांगतनूरुहाः॥ ५८

teṣu kāle vyajāyanta racitāvayavā hareḥ|

śaktibhirdurvibhāvyābhiḥ komalāṃgatanūruhāḥ|| 58

अर्थ

भगवान्‌की अचिन्त्य शक्तिसे समय आनेपर वे अंडे फूट गये और उनमेंसे हाथ-पैरवाले बच्चे निकल आये। उनका एक-एक अंग और रोएँ अत्यन्त कोमल थे॥ ५८॥✎ 1820

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1820 अक्षर (एक स्थानपर, प्रमाणसहित): बच्चे → हाथ-पैरवाले बच्चे

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