॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.7.60
तासां पतत्त्रैः सुस्पर्शैः कूजितैर्मुग्धचेष्टितैः।
प्रत्युद्गमैरदीनानां पितरौ मुदमापतुः॥ ६०
tāsāṃ patattraiḥ susparśaiḥ kūjitairmugdhaceṣṭitaiḥ|
pratyudgamairadīnānāṃ pitarau mudamāpatuḥ|| 60
अर्थ
बच्चे तो सदा-सर्वदा प्रसन्न रहते ही हैं; वे जब अपने सुकुमार पंखोंसे माँ-बापका स्पर्श करते, कूजते, भोली-भाली चेष्टाएँ करते और फुदक-फुदककर अपने माँ-बापके पास दौड़ आते तब कबूतर-कबूतरी आनन्दमग्न हो जाते॥ ६०॥