श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.1.10

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

स एकच्छत्रां पृथिवीमनुल्लंघितशासनः।

शासिष्यति महापद्मो द्वितीय इव भार्गवः॥ १०

sa ekacchatrāṃ pṛthivīmanullaṃghitaśāsanaḥ|

śāsiṣyati mahāpadmo dvitīya iva bhārgavaḥ|| 10

अर्थ

महापद्म पृथ्वीका एकच्छत्र शासक होगा। उसके शासनका उल्लंघन कोई भी नहीं कर सकेगा। क्षत्रियोंके विनाशमें हेतु होनेकी दृष्टिसे तो उसे दूसरा परशुराम ही समझना चाहिये॥ १०॥

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